
दो दिन के इजरायल दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री Narendra Modi का स्वागत जिस अंदाज़ में हुआ, वह कूटनीति से ज्यादा भावनाओं की कहानी बन गया।
इजरायल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने संसद में खड़े होकर कहा “आप सिर्फ मित्र नहीं, भाई से बढ़कर हैं।” यह बयान इजरायली संसद Knesset के इतिहास में एक यादगार पल बन गया।
राजनीति में शब्द नाप-तौल कर बोले जाते हैं, लेकिन यहां भावनाएं खुलकर बहती दिखीं।
एयरपोर्ट से संसद तक: स्वागत में दिखी विशेष केमिस्ट्री
तेल अवीव के बेन गुरियन एयरपोर्ट पर खुद नेतन्याहू और उनकी पत्नी सारा ने पीएम मोदी का स्वागत किया। यह दृश्य केवल प्रोटोकॉल नहीं, पर्सनल टच का संदेश था।
नेतन्याहू ने 2017 की यात्रा को याद करते हुए भूमध्य सागर वाली ‘वॉटर वॉक’ का जिक्र किया और मजाकिया अंदाज़ में कहा “हम पानी पर नहीं चले, लेकिन हमने चमत्कार जरूर किए।”
संदेश साफ था व्यापार दोगुना, सहयोग तीन गुना, भरोसा चार गुना।
Knesset में गूंजे ‘Modi-Modi’
संसद के भीतर तालियों की गड़गड़ाहट और ‘Modi-Modi’ के नारे एक अलग ही कूटनीतिक माहौल बना रहे थे। पीएम मोदी ने कहा कि वह 140 करोड़ भारतीयों का अभिवादन और साझेदारी का संदेश लेकर आए हैं। उन्होंने याद दिलाया कि उनका जन्म उसी दिन हुआ था जिस दिन भारत ने इजरायल को आधिकारिक मान्यता दी थी इसे उन्होंने “इतिहास का रोचक संयोग” बताया।
आतंकवाद पर सख्त संदेश
7 अक्टूबर के हमलों का जिक्र करते हुए पीएम मोदी ने साफ कहा, “कोई भी कारण आम लोगों की हत्या को सही नहीं ठहरा सकता।”
भारत की “Zero Tolerance on Terrorism” नीति दोहराते हुए उन्होंने कहा कि डबल स्टैंडर्ड की कोई जगह नहीं है। यह संदेश केवल इजरायल के लिए नहीं, वैश्विक मंच के लिए भी था।

गाजा पीस इनिशिएटिव पर भारत का रुख
पीएम मोदी ने गाजा शांति पहल के समर्थन की बात दोहराई और कहा कि शांति का रास्ता कठिन हो सकता है, लेकिन बातचीत ही स्थायी समाधान है।
यहां भारत ने संतुलित कूटनीति का संकेत दिया सुरक्षा के साथ संवाद।
भारत में यहूदी समुदाय पर गर्व
पीएम मोदी ने कहा कि भारत वह भूमि है जहां यहूदियों का कभी उत्पीड़न नहीं हुआ। उन्होंने इसे सभ्यताओं के आपसी सम्मान की मिसाल बताया। यह बयान भारत-इजरायल रिश्तों को केवल सामरिक नहीं, सांस्कृतिक आधार भी देता है।
इकॉनमी और ग्लोबल पावर की बात
प्रधानमंत्री ने भारत की तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था का जिक्र करते हुए कहा कि जल्द ही भारत टॉप तीन इकॉनमी में शामिल होगा। साफ संकेत यह दौरा केवल भावनात्मक नहीं, स्ट्रेटेजिक और आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने वाला है।
कूटनीति में ‘भावनात्मक पूंजी’ का खेल
मोदी-नेतन्याहू की केमिस्ट्री बताती है कि आधुनिक डिप्लोमेसी सिर्फ समझौतों की फाइलों में नहीं, पब्लिक मैसेजिंग और पर्सनल बॉन्डिंग में भी लिखी जाती है।
जहां एक ओर सुरक्षा और आतंकवाद पर सख्त संदेश है, वहीं दूसरी ओर शांति और साझेदारी की बात भी है। राजनीति में यह संतुलन ही असली कला है और यही इस दौरे की असली हेडलाइन भी।
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